October 25, 2020

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खगड़िया के वीर सपूत शहीद मो. जावेद हुए सुपुर्द-ए-खाक, उमड़ा जनसैलाब, हर आंखें थी नम

खगड़िया : – जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी गोलीबारी में शहीद हुए आर्मी के जवान मो. जावेद का पार्थिव शरीर बुधवार की दोपहर जैसे ही पैतृक गांव माड़र दक्षिणी स्थित घर पहुंचा वैसे ही वीर सपूत को श्रद्धांजलि देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। जो, जहां, जैसे, जिस हालत में थे, वे वहीं से दौड़ पड़े। गम व गुस्से के बीच सरहद पर शहीद हुए खगड़िया के लाल वीर जावेद अमर रहे नारों से इलाका गूंज उठा। इससे पहले सड़क मार्ग से पटना से खगड़िया शहीद की पार्थिव शरीर पहुंचते ही लोगों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया। इसके बाद शहर के विभिन्न मार्गों में भ्रमण करते हुए शहीद की अंतिम यात्रा पैतृक गांव माड़र दक्षिणी पहुंचा । जहां पूर्व से मौजूद मंत्री अशोक चौधरी, विधायक पूनम देवी यादव, डीएम अनिरुद्ध कुमार, सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों सहित पुलिस-प्रशासन के आलाधिकारियों ने शहीद मो. जावेद को श्रद्धांजलि अर्पित किया । फिर बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक घर के सामने अंतिम दर्शन के लिये रखा गया । जहां , ताबूत में तिरंगे में लिपटे शहीद के पार्थिव शरीर से लिपट कर परिजन बिलख पड़े। जिसे देख हजारों लोगों की आंखें नम हो गयी। इसके बाद सेना व पुलिस के जवानों ने संयुक्त रुप से शहीद को अंतिम सलामी दी। इस दौरान हजारों लोगों में पाकिस्तान के प्रति काफी आक्रोश नजर आया। उपस्थित भीड़ ने पाकिस्तान मूर्दाबाद के नारे लगाये। और फिर शहीद को कब्रगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया गयाअंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब शहीद को अंतिम सलामी देने के लिए माड़र दक्षिणी में जनसैलाब उमड़ पड़ा. अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए. जब तक सूरज चांद रहेगा, जावेद तेरा नाम रहेगा के नारे से इलाका गूंज उठा. माड़र दक्षिणी स्थित कब्रिस्तान में शहीद मो. जावेद के जनाजे की नमाज पढ़ी गयी, जिसमें हजारों लोग गवाह बने. जनाजे की नमाज दा करने के बाद शव को सुपुर्द-ए-खाक किया गया. इससे पहले बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने शहीद के परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया, साथ ही सरकार से हर संभव सहायता का भरोसा दिया. तिरंगे से पट गया पूरा इलाका शहीद के पैतृक गांव पूरे माड़र दक्षिणी को तिरंगा झंडे से पाट दिया गया था. शहर के बच्चे,बूढ़े व जवान हर किसी के जुबान पर बस शहीद मो. जावेद की ही चर्चा थी. हर कोई अपने बहादुर बेटे की शहादत पर गर्व महसूस कर गौरवान्वित हो रहे थे. सुपुर्द ए खाक होने तक वीर जावेद अमर रहे, हिंदुस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद जैसे नारे हर ओर फिजा में गूंजते रहे. इससे पहले बुधवार को पूरे सम्मान के साथ शहीद जावेद के पार्थिव शरीर को पटना से सड़क मार्ग से माड़र दक्षिणी पंचायत लाया गया. शहीद के शव को जनाजे की नमाज के लिए माड़र दक्षिणी मैदान में लाया गया. इस दौरान वहां मौजूद सभी भाई परवेज, अबू बसर, जफर, मो. हिरा, आसिफ आदि बदहवास होकर रो रहे थे. कई लोगों ने शहीद जावेद के भाई परवेज, अबू बसर, जफर, मो. हिरा, आसिफ को ढांढस बंधाने का प्रयास किया लेकिन उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. रोते हुए परवेज और जफर ने कहा कि आखिर कब तक ऐसा चलता रहेगा.जफर ने सरकार के रवैये पर आक्रोश प्रकट करते हुए कहा कि केवल चेतावनी से कुछ नहीं होने वाला है. सरकार आर-पार की लड़ाई का फैसला करें और आतंक के पनाहगार पकिस्तान को उस भाषा में जवाब दे,जो उसे समझ में आती है. शहर के नौजवानों में दिखा देशभक्ति का जज्बा खगड़िया. कश्मीर में पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में शहीद हुए जांबाज साथी मो जावेद की शहादत पर गौरवान्वित महसूस कर रहे स्थानीय युवाओं में देशभक्ति का जज्बा देखते ही बन रहा था. यहां नौजवानों के जज्बे को देखकर ऐसा लगा कि अगर इन्हें मौका दे दिया जाए तो ये चंद दिनों में वतन के दुश्मनों को उनकी औकात बता देंगे. हर नौजवान वतन के लिए अपनी कुर्बानी देने को तैयार दिखे. जब मीडिया वालों ने इन नौजवानों की देशभक्ति व देश के लिए कुछ कर गुजरने के जज्बे का कद्र करते हुए उनसे जब बात की तो उनकी मनोभावना कुछ इस तरह सामने आयी. साथ ही शहादत का लेंगे बदला शहीद जावेद के साथी आर्मी जवान मुंगेर निवासी मोहम्मद इरफ़ान और बेतिया निवासी मो. मंजूर भी बुधवार को जावेद के पैतृक निवास स्थान माड़र दक्षिणी पंचायत पहुंचे. उन्होंने कहा कि एक आर्मी और देश के नागरिक होने के नाते मेरा भी खून खौलता है. भारत के वीर जवानों के खून के एक-एक बूंद का बदला लिया जायेगा.उन्होंने कहा कि इस हमले को हम नहीं भूलेंगे और इसका बदला पाकिस्तान से लेकर रहेंगे. मो. इरफ़ान और मो. मंजूर ने कहा कि हमले के लिए जिम्मेदार पाकिस्तानी आर्मी को सबक सिखाया जायेगा. इस दुख की घड़ी में शहीद जवान के परिवारवालों के साथ हम सब खड़े हैं. देश की रक्षा की खातिर और बेटे को कर देंगे कुर्बान शहीद के अब्बा मो. बकरूद्धीन ने कहा वतन के लिए और बेटों को कुर्बान कर दूंगा. अपने जवान बेटे के अचानक बिछड़ने से 70 वर्षीय मो. बकरूद्धीन भले मर्माहत हैं लेकिन देश की रक्षा और पकिस्तान को सबक सिखाने के लिए वे अपने और भी बेटे को कुर्बान करने को तैयार हैं. उन्होंने कहा की यदि सरकार बुलाएगी तो हमारा सभी बेटा वतन की रखवाली के लिए कुर्बानी देने के लिए तैयार है. शहीद मो जावेद को पूरे राजकीय सम्मान के साथ स्थानीय कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक किया गया. इस दौरान शहीद की अंतिम यात्रा में लोगों का सैलाब उमड़ पडा. तिरंगे को कलेजे से लगाकर फफक पड़े शहीद जावेद के पिता खगड़िया. शहीद मो. जावेद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा तो सेना के अधिकारियों द्वारा दिये गये तिरंगे को सीने से लगा कर शहीद के पिता बकरूद्धीन फफक फफक कर रो पड़े. यह वहीं राष्ट्रीय ध्वज था जिसमें शहीद सपूत का पार्थिव शरीर जम्मू-कश्मीर से लपेट कर पैतृक गांव माड़र दक्षिणी में लाया गया था. सेना के अधिकारियों द्वारा जब राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को शहीद सैनिक के शरीर से अलग कर पिता को जब सौंपा गया तो वे उसे अपने कलेजे से लगा कर फफक कर रो पड़े. शहीद सपूत की एक झलक पाने को उमड़े लोग 28 वर्षीय मो. जावेद जिस गांव की मिट्टी में खेल-कूदकर बड़ा हुआ था. देश सेवा के लिए सेना में जाने का सपना देखा था.खगड़िया की मिट्टी का यही लाल बुधवार को देखते ही देखते उसी अपने गांव की मिट्टी में मिल गया. अपने शहीद सपूत की एक झलक पाने को गांव में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. हर किसी का रूख माड़र दक्षिणी की ओर था. सबकी आंखें नम थीं और परिजनों के विलाप से माहौल गमगीन था. सभी अंतिम दर्शन को लालायित थे. अपने-अपने घरों से महिलाएं भी झलक पाने को निकल पड़ी थीं. शहीद के पार्थिव शरीर के इंतजार में रात भर जागते रहे ग्रामीण माड़र दक्षिणी में बुधवार की दोपहर में शहीद सैनिक का पार्थिव शरीर सड़क मार्ग के रास्ते पहुंचा था, उस दौरान भी गांव के ग्रामीण सोमवार की देर रात से ही जगे थे और अपने लाल के शव आने की प्रतीक्षा कर रहे थे. मो. जावेद की शहादत से पूरा गांव काफी मर्माहत नजर आ रहा था. इस घटना के बाद पुत्र के वियोग में मां अमीना खातून एवं पत्‍‌नी फरजाना खातून के आंखों से आंसू नहीं थम पा रहे थे. शव देखते ही दोनों फफक पड़े. बूढ़े पिता मो. बकरूद्धीन रो-रोकर बेहाल थे. आस पड़ोस की महिलाएं ढांढस बंधाने में लगी हुई थीं. मो. बकरूद्धीन के द्वितीय पुत्र मो. जावेद वर्ष 2010 में फौज में बहाल हुए थे. मो. जावेद की शादी वर्ष 2015 में माड़र उत्तरी पंचायत के सबलपुर गांव के फरजाना खातून के साथ हुई थी. वैवाहिक जीवन में इन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई है जो अभी तीन वर्ष का है. शहीद की पत्नी अभी गर्भवती है. शहीद सैनिक को दी गयी राइफल से सलामी खगड़िया के माड़र दक्षिणी गांव में शहीद सैनिक मो. जावेद को अंतिम विदाई देने से पूर्व उन्हे साथ में आये सेना के जवान व बिहार पुलिस द्वारा संयुक्त रुप से अंतिम सलामी दी गयी. सबसे पहले सेना के जवानों ने अपने शहीद साथी के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हे श्रद्धांजलि दी. साथ ही आत्मा की शांति के लिए मौन भी रखा.शहीद के शव के साथ एक पदाधिकारी जम्मू-कश्मीर रेजीमेंट से आये थे.जबकि अधिकांश जवान बिहार रेजीमेंट के थे.सलामी में खगड़िया पुलिस के जवानों ने भी भाग लिया. शहीद जवान की प्रोफाइल नाम : मो. जावेद, पिता : मो. बकरूद्धीन, उम्र : 28 वर्ष निवासी : माड़र दक्षिणी, मैट्रिक : सीएस उच्च विद्यालय माड़र उत्तरी इंटर : कोशी कॉलेज खगड़िया, आर्मी में बहाली : फरवरी 2010 शहादत : 10 जून 2019

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