October 21, 2020

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बगैर मैट्रिक व इंटर किए सेंट्रल जेल के कैदी होंगे पोस्ट ग्रेजुएट

पूर्णिया :- सेट्रल जेल के बंदी अपना आगामी जीवन बेहतर बनाने के लिए सजा के दौरान भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर पाएंगें। जुलाई सत्र से जेल में बंदियों को स्नातक व स्नातकोत्तर तक की शिक्षा प्रदान की जायेगी। वही जो लोग 10 व 12 वीं पास नहीं है, वे भी स्नातक में प्रवेश ले सकेंगें। उनके लिए छह माह का एक विशेष कोर्स चलाया जाएगा, जिसे पास करने पर उन्हें सीधे ही स्नातक में प्रवेश दे दिया जाएगा। बगैर मैट्रिक या इंटर पास किये कैदियों को स्नातक की शिक्षा दी जाएगी। डिग्री मिलने के बाद कैदी जेल से बाहर निकलने के बाद समाज के मुख्य धारा में जुड़ सकते है। इसके तहत जेल परिसर में स्थल का भी चयन कर लिया गया। जेल उपाधीक्षक रामानुज कुमार ने बताया कि जेल में जल्द ही उच्च शिक्षा की चाह रखने वाले बंदियों को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई करवायी जायेगी। इसके तहत जेल में बंद कैदी, हाजती, सजावार कैदी इस योजना के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते है। उन्होंने बताया कि जो कैदी मैट्रिक और इंटर पास किए है वो सीधे स्नातक की पढ़ाई कर सकते है। लेकिन जो कैदी मैट्रिक और इंटर पास नहीं किए है उनके लिए इग्नु द्वारा चलाए जा रहे विशेष प्रोग्राम बैचलर प्रीपेटरी प्रोग्राम के तहत छह माह का कोर्स कर स्नातक में दाखिला के योग्य हो सकते है। उन्होंने बताया कि इसमें एनआईओएस में 30 बंदी, बिहार बोर्ड ऑफ ओपन स्कूल एंड एक्जामिनेशन में 22 बंदी, नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी में 27 बंदी और इंदिरा गांधी नेशनल ओपेन यूनिवर्सिटी में 37 बंदी को उच्चस्तरीय शिक्षा प्रदान कराई जायेगी। उन्होंने आगे बताया कि इच्छुक बंदियों को नामांकन प्रकिया प्रारंभ कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि व्यवसायिक प्रशिक्षण के उद्देश्य से एसबीआई पूर्णिया द्वारा वर्मी कम्पोस्ट और डेयरीफार्मिंग का पहला बैच का प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे बैच का प्रशिक्षण भी जल्द ही शुरू की जायेगी। इसके अलावा कौशल विकास मिशन के तहत जनहित मंच रांची द्वारा सिलाई-बुनाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा बंदियों को प्लंबर कोर्स और गार्डेनर कोर्स प्रशिक्षण दिया जायेगा। इस कोर्स की शुरूआत भी जल्द ही की जायेगी। जेल में पूर्व में भी दी जा रही थी रोजगारपरक शिक्षाजेल में बंदियों को मुख्य धारा से जुड़ने की दिशा में सरकार लगातार बंदियों को शिक्षित करने का प्रयास कर रही है। जेल अधीक्षक ई जितेन्द्र कुमार ने बताया कि पिछले दिनों जेल में बंदियों को सिलाई प्रशिक्षण के साथ कई अन्य रोजगारपरक ट्रेनिंग दिया गया। ऐसे बंदी ट्रेनिंग पाकर जेल से बाहर निकलने के बाद कार्य कर सकेंगे। सेंट्रल जेल के बंदी भी शिक्षा पाकर जेल के अंदर भी कई कार्य बखुबी निभा रहे हैं। बता दें कि जेल का नाम सुनते ही जहां लोग कांपने लगते हैं वहीं अब इसका रूप बदल रहा है। जेल में जहां कैदी किताबें पढ़कर समय गुजारने के साथ खुद को शिक्षित बना रहे हैं वहीं टीवी देखकर और खेलकर खुद का मनोरंजन भी कर रहे हैं। जेल अब बंदियों के लिए भविष्य बनाने का काम भी कर रही हैं।

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