December 1, 2020

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चुनाव आयोग की ऐतिहासिक कार्रवाई, कम किए प्रचार के 19 घंटे; बंगाल के दो शीर्ष अफसर हटाए गए


लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान पश्चिम बंगाल में मंगलवार को हुई चुनावी हिंसा पर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अख्तियार किया है। नाराज चुनाव आयोग ने दंडात्मक कारवाई करते हुए एडीजी सीआइडी राजीव कुमार को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करके केंद्रीय गृह मंत्रालय भेज दिया है, जबकि राज्य के प्रधान गृह सचिव अत्रि भट्टाचार्य को भी हटा दिया है।

इसके अलावा राज्य के चुनाव प्रचार में 19 घंटे की कटौती भी की गई है। आयोग ने ऐसा पहली बार किया गया है। नियमानुसार चुनाव प्रचार शुक्रवार शाम पांच बजे से बंद होना था। लेकिन अब यह गुरुवार रात 10 बजे ही खत्म हो जाएगा।

पश्चिम बंगाल के प्रधान गृह सचिव अत्रि भट्टाचार्य पर बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी को निर्देश देकर चुनाव प्रक्रिया में दखल देने का आरोप लगा है। अब अगले आदेश तक राज्य के मुख्य सचिव गृह विभाग की देखरेख करेंगे। वहीं, एडीजी सीआइडी राजीव कुमार को गुरुवार सुबह 10 बजे केंद्रीय गृह मंत्रालय में रिपोर्ट करने के आदेश दिया गया है ।

प्रचार के समय में कटौती पर चुनाव आयोग ने कहा, यह संभवत: पहली बार है जब चुनाव आयोग ने अनुच्छेद 324 को इस तरीके से लागू किया है। लेकिन यह अराजकता और हिंसा की पुनरावृत्ति के मामलों में अंतिम नहीं हो सकता जो शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संचालन को प्रभावित करता है। चुनाव आयोग ने राज्य में हुई हिंसा पर दु:ख जताते हुए कहा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा के साथ की गई बर्बरता पर आयोग को गहरा दु:ख है।

उम्मीद है कि राज्य प्रशासन द्वारा ऐसा करने वालों का पता लगाया जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कारवाई की जाएगी। आयोग ने प्रचार के समय में कटौती करते हुए चुनाव प्रचार और चुनाव से जुड़े किसी भी तरह के राजनीतिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। साथ ही आयोग ने रैलियों, जनसभाओं और रोड शो पर भी रोक लगाई है।

आयोग ने सभी दलों को सख्त हिदायत दिया है कि वे सोशल मीडिया पर किसी तरह के वीडियो डालने से परहेज करें। मालूम हो कि लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में पश्चिम बंगाल की नौ संसदीय सीटों दमदम, बारासात, बशीरहाट, जयनगर, मथुरापुर, जाधवपुर, डायमंड हार्बर, दक्षिण और उत्तरी कोलकाता में 19 मई को मतदान होना है।

गौरतलब है कि कोलकाता में मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में हुए बवाल के बाद से पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ा हुआ है। इस हंगामे की वजह से आखिरी चरण की वोटिंग से पहले टीएमसी और भाजपा का टकराव गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। ममता बनर्जी ने जहां हिंसा के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं भाजपा ने चुनाव आयोग से ममता के चुनाव प्रचार पर बैन लगाने की मांग की है।

चुनाव आयोग की कार्यवाही पर ममता ने दी प्रतिक्रिया
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि अमित शाह ने अपनी सभा के माध्यम से बंगाल में हिंसा करवाया। ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ी गई, लेकिन पीएम मोदी ने अभी तक इसके लिए खेद भी नहीं जताया है । बंगाल के लोगों ने इस घटना को गंभीरता से लिया है । अमित शाह के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि अमित शाह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव आयोग को धमकी दी थी। क्या ये उसी का परिणाम है? बंगाल डरा नहीं है। बंगाल को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि मैं मोदी के खिलाफ बोल रही हूँ । ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के इसारे पर चल रहा है। यह एक अभूतपूर्व निर्णय है। कल की हिंसा अमित शाह की वजह से हुई थी। चुनाव आयोग ने उन्हें कारण बताओ नोटिस क्यों नहीं जारी किया या उन्हें बर्खास्त क्यों नहीं किया?

रोड शो में हुए बवाल को लेकर शाह पर दो थानों में एफआइआर
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान विद्यासागर कॉलेज के बाहर पथराव के बाद हुई झड़प और ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने के मामले में छात्र-छात्राओं ने दो थानों में अमित शाह समेत अज्ञात लोगों के खिलाफ दो एफआइआर दर्ज कराई हैं। पुलिस ने गैर जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में अभी तक 58 भाजपा समर्थकों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

कोलकाता पुलिस आयुक्त डॉ. राजेश कुमार ने कहा है कि इस घटना में पुलिस ठोस कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। उधर, अपने खिलाफ दर्ज एफआइआर के मामले में अमित शाह ने कहा कि भाजपाई डरते नहीं हैं। यदि साहस है तो किसी भी एजेंसी से घटना की निष्पक्ष जांच करा ली जाए।

मूर्ति तोड़े जाने को लेकर वामदलों ने जताया विरोध

अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा और ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने के विरोध में बुधवार को माकपा समेत अन्य वामपंथी दलों के नेतृत्व में जुलूस निकाला। कॉलेज स्क्वायर से हेदुआ तक विरोध जुलूस निकालकर वामदलों ने हिंसा व तोड़फोड़ की निंदा की । वहीं वामदलों द्वारा घटना के पीछे वास्तविक तथ्यों का पता लगाने के लिए संपूर्ण मामले की जांच की बात कही गई।

इस दौरान माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रकाश करात, राज्य माकपा सचिव सूर्यकांत मिश्र, वाममोर्चा के चेयरमैन विमान बोस और सुजान चक्रवर्ती समेत अन्य नेता मौजूद रहे। वहीं मीडिया कर्मियों से मुखातिब हुए येचुरी ने कहा कि सुनियोजित योजना के तहत मूर्ति तोड़ी गई है। ऐसे में आरोपियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

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