October 20, 2020

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मोदी ने कहा- कोई नहीं जानता, पाक को चला कौन रहा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने में सबसे बड़ी समस्या यह पता लगाना है कि उस देश की बागडोर किसके हाँथ में है उसे चला कौन रहा है और किसके साथ बात करनी है।

जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में करीब 2.5 हजार लोगों के समक्ष एक टीवी चैनल को दिए गए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के साथ यह अनुभव सिर्फ उनका अकेले का नहीं है। अमेरिका, चीन, रूस, खाड़ी और अरब आदि देशों के नेताओं का भी यही मानना है। मोदी ने कहा, विश्व के कई नेताओं ने मुझ से कहा है कि वे भी अबतक नहीं जान पाए हैं कि पाकिस्तान में किससे बात करनी है।

प्रधानमंत्री ने सवालिया लहजे में कहा, ‘आप किससे बात करेंगे.. सेना के साथ, आइएसआइ से या निर्वाचित सरकार के साथ? विश्व के कई नेताओं ने मुझे बताया कि हम भी नहीं जानते कि उस देश की सत्ता किसके हाँथ में है, उस देश को चलाता कौन है। इसलिए पाकिस्तान को पहले अपनी यह समस्या सुलझाने दीजिए।’

2015 में अचानक की गई अपनी पाकिस्तान यात्रा के बारे में मोदी ने बताया कि अफगानिस्तान से लौटते समय नवाज शरीफ ने उन्हें फोन करके मिलने की इच्छा जाहिर की थी। उनकी इस यात्रा का मकसद यह संदेश देना था कि भारत के मन में पाकिस्तान के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि, ‘इस विषय पर मैंने सुषमा जी (विदेश मंत्री) से चर्चा की। उन्होंने मुझसे कहा कि आप फैसला कीजिए। मैंने एनएसए और एसपीजी से बात की। हर कोई चिंतित था क्योंकि अधिकारियों के पास वीजा नहीं थे, न ही वहां कोई सुरक्षा के प्रबंध किए गए थे और न ही किसी को वहां (शरीफ के पैलेस का) के लेआउट (नक्शा) की जानकारी थी। हमें वहां सीधे ही उतरना था। मैंने कहा, चलिए चलते हैं और वहीं चलकर देखते हैं।’

नवाज शरीफ को सच्चा व्यक्ति बताते हुए मोदी ने कहा कि वहाँ के लोगों से भारत के बारे में झूठ बोला जा रहा है। इस यात्रा से उन तक यह संदेश पहुंच गया कि भारत पाकिस्तान के लोगों का भला ही चाहता है। लेकिन हमारी वापसी के एक हफ्ते के अंदर पठानकोट (हमला) हो गया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जब इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने फोन पर बात की। मैंने उनसे कहा कि दोनों देश कई लड़ाइयां लड़ चुके हैं और हर बार पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा। प्रधानमंत्री के तौर पर हम दोनों को अगले पांच साल गरीबी मिटाने के लिए काम करना चाहिए। लेकिन इसके बाद पुलवामा जैसी घटना हो गई।

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