November 26, 2020

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पाकिस्‍तान के जासूस पक्षी से भारतीय पक्षीयों का युद्ध,मार गिराया पाकिस्तानी पक्षी को

पटना :- एक अहम सवाल क्या देश के दुश्मनों की पहचान परिंदे भी कर लेते हैं? बिहार के वैशाली जिले में यह सवाल आज चर्चा का विषय बना हुआ है। वाकया एक जासूस विदेशी पक्षी (बाज) को स्थानीय पक्षियों द्वारा मार गिराने जाने का है।ऐसे पक्षी राजस्‍थान में पाकिस्‍तानी सीमा से पहले भी आते रहे हैं। लेकिन इस पक्षी का बिहार आना वह भी चुनाव के समय यह जांच का विषय है, लेकिन प्रश्न यह है कि क्‍या यह पक्षी पाकिस्‍तानी खुफिया संगठन आइएसआइ या किसी आतंकी संगठन के अभियान का हिस्‍सा था?
भारत में इस तरह के पक्षी का आना कोई नई बात नहीं। पाकिस्‍तान सीमावर्ती इलाकों में ऐसे पक्षी मिलते रहे हैं। ऐसा ही एक पक्षी 2016 में पंजाब के पठानकोट में उस जगह मिला था, जहां आतंकियों ने एयरफोर्स बेस पर हमला किया था। उस पक्षी के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी देता पाकिस्‍तान का संदेश भी मिला था। किंतु देश के भीतर बिहार में यह ऐसी पहली घटना है। दुश्‍मन देश के जासूस पक्षी को अपने देश के पक्षियों द्वारा मार गिराने की शायद यह पहली घटना है।
मृत पक्षी के शरीर में लगी थी जासूसी डिवाइस
घटना वैशाली के महनार थाना के हसनपुर गांव की है जहाँ बाहर से आए एक पक्षी को स्थानीय पक्षियों ने मार गिराया। मरे पक्षी के शरीर पर लगी डिवाइस से इलाके में सनसनी फैल गई। इस पक्षी का जासूसी के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका लोगों ने जताई है। सूचना पाकर पहुंचे महनार थानाध्यक्ष ने जांच व कार्रवाई के लिए पक्षी का शव वन विभाग को सौंप दिया है।

हसनपुर गांव निवासी महनार के पूर्व प्रखंड प्रमुख सच्चिदानंद सिंह के घर के निकट गुरुवार को स्थानीय पक्षियों ने बाहर से आए पक्षी को घेर कर मार डाला। करीब आधे घंटे चली पक्षियों की इस महायुद्ध को देखने के लिए भारी भीड़ लग गई थी। मृत पक्षी के जमीन पर गिरते ही उसे देखने के लिये ग्रामीण जब पक्षी के नजदीक पहुंचे तो उसके शरीर में लगी डिवाइस पर लोगों की नजर पड़ी । पैर में पीतल का एक टैग भी था। इसकी जानकारी थाना को दी गई।
पूर्व में भी ऐसे पक्षी पाकिस्‍तान से आते रहे हैं ।
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस प्रकार की डिवाइस लगे पक्षी अक्सर पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर राजस्थान के जैसलमेर आदि जिलों में मिलते रहे हैं। ऐसे पक्षी सीमा पार से आते रहे हैं। महनार थानाध्यक्ष उदय शंकर ने पक्षी के शव को वन विभाग को जांच के लिए सौंप दिया है।
भारत में पक्षियों से जासूसी कोई नई बात नहीं। पाकिस्‍तान के सीमावर्ती इलाकों में मिलते रहे ऐसे पक्षी ।जिनका सम्बंध पाकिस्‍तानी जासूसी संगठन आइएसआइ या आतंकी संगठनों से जोड़ा जाता रहा है। राजस्थान के सीमावर्ती जैसलमेर जिले में सालों पहले अप्रैल 2013 में भी एक मृत बाज पक्षी को पकड़ा गया था। तब सीमा सुरक्षा बल के एक प्रवक्ता ने बताया कि मृत पक्षी के शरीर पर 10 इंच का एक एंटीना लगा था। इससे पहले भी एक बाज को एंटीना के साथ ज़िंदा पकड़ा जा चुका था।

नवंबर 2017 में भारत-पाकिस्तान सीमा पर एक पाकिस्तानी बाज पकड़ा गया था। उसकी पूंछ पर एक एंटीना तो था ही, पैरों में छल्ले भी लगे थे। सुरक्षा एजेंसियों ने जब बाज का एक्स-रे करवाया तो शरीर के अंदर माइक्रो चिप होने की बात सामने आई थी। अक्टूबर 2016 में बीकानेर से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट अनूपगढ़ क्षेत्र में एक पाकिस्तानी ट्रेंड बाज पकड़ा गया था।
जासूसी व संदेश भेजने में कबूतरों का इस्‍तेमाल भी होता रहा है। अप्रैल 2017 में पाकिस्तान की सीमा पर बीएसएफ के जवानों ने एक ट्रेंड कबूतर को पकड़ा था। कबूतर के पंखों के नीचे खास तरह से नंबर लिखे थे।
इसके पहले साल 2016 में पंजाब पुलिस ने भी पाकिस्तान से सटी सीमा के पास से एक कबूतर को पकड़ा था। यह कबूतर पंजों में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी देने का संदेश ले लेकर आया था। उर्दू भाषा में लिखा था, ‘मोदी, हम 1971 वाले लोग नहीं हैं। अब बच्चा-बच्चा भारत के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार है।‘

यक्षप्रश्न है कि गुरुवार को स्‍थानीय पक्षियों के महासमर में मारा गया यह जासूस पक्षी बिहार में क्‍या कर रहा था? अगर सचमुच में पाकिस्‍तान से आया था तो क्‍या पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के किसी अभियान का हिस्‍सा था यह पक्षी ? या यह किसी आतंकी साजिश का हिस्‍सा था? देश में अभी तक मिले जासूस पक्षियों को देखते हुए इस घटना को हल्‍के में लेना भूल होगी। बिहार में लोकसभा चुनाव प्रचार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तमाम बड़े नेताओं की आवाजाही को देखते हुए यह एक गंभीर मामला है।और जाँच का विषय भी ।

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