June 17, 2021

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अप्रैल – मई में 2.27 करोड़ लोगों ने गंवाई नौकरियां, बिहार झारखंड की हालत होगी बद से बदत्तर

पटना (बिहार):- कोरोना वैश्विक महामारी की दूसरी लहर की वजह से देश में केवल अप्रैल और मई माह में 22.7 मिलियन यानी 2.27 करोड़ लोगों ने अपनी नौकरी गंवा दी है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) के सीईओ महेश व्यास ने इकोनॉमिक टाइम्स के साथ बातचीत में ये बात कहीं। उन्होंने आगे कहा कि देश में कुल नौकरियों की संख्या 400 मिलियन यानी लगभग 40 करोड़ है। इन 40 करोड़ नौकरीपेशा में से जो कार्यरत थे, उनमें से 2.27 करोड़ लोगों ने कोरोना की दूसरी लहर में सिर्फ दो माह (अप्रैल-मई) में अपनी नौकरी खो दी है।एनएफ.
वहीं महामारी के साथ-साथ देश में बढ़ रहे आर्थिक संकट के बीच महेश व्यास के इस बयान पर बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजश्वी यादव ने भी केंद्र और राज्य सरकार दोनों को लताड़ लगाई है।
तेजश्वी यादव ने अपने ट्वीटर हैंडल से महेश व्यास से बातचीत के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा है कि~2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से देश बेरोजगारी में डूब गया है। केंद्र हो या मेरा गृह राज्य, सत्ता में बैठे लोगों ने रोजगार सृजन पर पूरी तरह से यू-टर्न ले लिया है। बिहार में देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है और चलन के हिसाब से यह स्थिति अभी और बद से बदत्तर होगी।एनएफ.
गौरतलब है कि सीएमआईइ एक ऐसी स्वतंत्र संस्था है जो प्राथमिक डेटा संग्रहण, विश्लेषण और पूर्वानुमानों के आधार पर सरकारों, शिक्षाविदों, वित्तीय बाजार, व्यावसायिक उद्यमों, पेशेवर और मीडिया सहित व्यापार सूचना उपभोक्ताओं के पूरे स्पेक्ट्रम को सेवाएं प्रदान करती है। इसके डेटा को विश्वसनीय माना जाता है।
वहीं पिछले साल 18 अगस्त 2020 को सीएमआईइ की ही एक रिपोर्ट में बताया गया था कि केवल जुलाई माह में ही देश में 50 लाख लोगों की नौकरी चली गयी। और अप्रैल की तालाबंदी के बाद से कुल 1.89 करोड़ लोगों ने अपनी नौकरी खो दी।एनएफ
गौरतलब है कि बिहार विधान सभा 2020 के आम चुनावों में बेरोजगारी को एक अहम मुद्दा बनाया गया था। महागठबंधन ने इस मुद्दे को इतना अधिक भुनाया था कि बीजेपी ने भी दबाव में आकर 19 लाख रोजगार देने का प्रलोभन दे डाला था, हालांकि उसके प्रलोभन की संख्या महागठबंधन की संख्या से काफी कम थी।
अब जबकि देश एक साल पुराने कोरोना संकट के साथ आर्थिक संकट से भी जूझ रहा है। जीडीपी -7.3% पर चली गयी है। बेरोजगारी अपनी चरम सीमा पर पहुंचती जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में अब लगता है कि देश को तथाकथित ‘राम’ ही इन सब से उबारेंगे।

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